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Hindi Shayari 4 Line Mein – Hum To Dosto Ki Wafa Se Darte Hai

गुनाह करके सज़ा से डरते हैं,
जहर पी के दवा से डरते हैं,
दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं,
हम तो दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं


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Best Ever Hindi Shayari On Life – क्या खुब लिखा है किसी ने


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क्या खुब लिखा है किसी ने …

“बक्श देता है ‘खुदा’ उनको, … !
जिनकी ‘किस्मत’ ख़राब होती है … !!

वो हरगिज नहीं ‘बक्शे’ जाते है, … !
जिनकी ‘नियत’ खराब होती है… !!”

न मेरा ‘एक’ होगा, न तेरा ‘लाख’ होगा, … !
न ‘तारिफ’ तेरी होगी, न ‘मजाक’ मेरा होगा … !!

गुरुर न कर “शाह-ए-शरीर” का, … !
मेरा भी ‘खाक’ होगा, तेरा भी ‘खाक’ होगा … !!

जिन्दगी भर ‘ब्रांडेड-ब्रांडेड’ करने
वालों … !
याद रखना ‘कफ़न’ का कोई ब्रांड नहीं होता … !!

कोई रो कर ‘दिल बहलाता’ है … !
और कोई हँस कर ‘दर्द’ छुपाता है … !!

क्या करामात है ‘कुदरत’ की, … !
‘ज़िंदा इंसान’ पानी में डूब जाता है और ‘मुर्दा’ तैर के
दिखाता है … !!

‘मौत’ को देखा तो नहीं, पर शायद ‘वो’ बहुत
“खूबसूरत” होगी, … !
“कम्बख़त” जो भी ‘उस’ से मिलता है,
“जीना छोड़ देता है” … !!

‘ग़ज़ब’ की ‘एकता’ देखी “लोगों की ज़माने
में” … !
‘ज़िन्दों’ को “गिराने में” और ‘मुर्दों’ को “उठाने
में” … !!

‘ज़िन्दगी’ में ना ज़ाने कौनसी बात “आख़री”
होगी, … !
ना ज़ाने कौनसी रात “आख़री” होगी ।

मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरे से ना जाने कौनसी “मुलाक़ात” “आख़री होगी” …

Romantic Love Shayari Ghazal In Hindi – Tumhare Naam Apni Zindgaani


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तुम्हारे नाम अपनी जिंदगानी इस तरह कर लें,
तेरी बाहों में शब गुजरे, पनाहों में सुबह कर लें.

नहीं बंधना हमें रस्मों-रिवाजों में, समाजों में,
खुले आकाश के पंछी बसेरा हर जगह कर लें.

इरादा, हौसला, ताक़त, मोहब्बत सब तुम्ही से है,
तू गर इक बार आ जाये तो दुनिया को फ़तेह कर लें.

दरो-दीवार पर फैली उदासी को मिटा दें हम,
हर इक शै में तबस्सुम हो, चलो ऐसी वजह कर लें.

अदावत तो है अपनी नफरतों के रहनुमाओं से,
जो दिल में दे जगह उससे भला न क्यूँ सुलह कर लें?

ख़ुदा की कद्र करता है मगर काफिर भी है “परिमल”,
कभी आओ जो महफ़िल में, इबादत पर जिरह कर लें.

– समीर परिमल

Very Heart Touching Hindi Shayari – Hindi Ghazal Lyrics – Ek Lafz Mohabbat Hai


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Ek Lafz Mohabbat Hai,
Jissay Kar K Daikho Tum..
Barbaad Na Ho Jao To
Mera Naam Badal Daina..

Ek Lafz Muqaddar Hai,
Jiss Say Larr K Daikho Tum..
Haar Na Jao To
Mera Naam Badal Daina..

Ek Lafz Wafaa Ka Hai,
Zamanay Mein Nahi Milti..
Kaheen Say Dhoond Kar Lao
To Mera Naam Badal Daina..

Ek Lafz Aansoo Hai,
Issay Dil Mein Chhupa Kar Daikho Tum..
Aankhon Say Na Beh Jaye
To Mera Naam Badal Daina..

Ek Lafz Judai Hai,
Issay Seh Kar Daikho Tum..
Toot Kar Na Bikhar Jao To
Mera Naam Badal Daina..

Jagjit Singh Ghazal – इंतहा आज इश्क़ की कर दी

इंतहा आज इश्क़ की कर दी
आपके नाम ज़िन्दगी कर दी

था अँधेरा ग़रीब ख़ाने में
आपने आ के रौशनी कर दी

देने वाले ने उनको हुस्न दिया
और अता मुझको आशिक़ी कर दी

तुमने ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे बिखरा कर
शाम रंगीन और भी कर दी

-पयाम सईदी

Jagjit Singh Ghazal – आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए

आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए
हमको ले आई मोहब्बत आपकी हम आ गए

अपने आने का सबब हम क्या बताएँ आपको
बैठे बैठे याद आई आपकी हम आ गए

हम है दिलवाले भला हम पर किसी का ज़ोर क्या
जायेंगे अपनी ख़ुशी अपनी ख़ुशी हम आ गए

कहिये अब क्या है चराग़ों की ज़रुरत आपको
लेके आँखों में वफ़ा की रौशनी हम आ गए

-पयाम सईदी

Jagjit Singh Ghazal – तेरा चेहरा है आईने जैसा

तेरा चेहरा है आईने जैसा
क्यों न देखूँ है देखने जैसा

तुम कहो तो मैं पूछ लूँ तुमसे
है सवाल एक पूछने जैसा

दोस्त मिल जाएँगे कई लेकिन
न मिलेगा कोई मेरे जैसा

तुम अचानक मिले थे जब पहले
पल नही है वो भूलने जैसा

-पयाम सईदी

Jagjit Singh Ghazal – काँटों से दामन उलझाना मेरी आदत है

काँटों से दामन उलझाना मेरी आदत है
दिल मे पराया दर्द बसाना मेरी आदत है

मेरा गला गर कट जाए तो तुझ पर क्या इल्ज़ाम
हर क़ातिल को गले लगाना मेरी आदत है

जिन को दुनिया ने ठुकराया जिन से हैं सब दूर
ऐसे लोगों को अपनाना मेरी आदत है

सब की बातें सुन लेता हूँ मैं चुपचाप मगर
अपने दिल की करते जाना मेरी आदत है

-पयाम सईदी

Jagjit Singh Ghazal – अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में

अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में
गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में

ये आग इश्क़ की है बुझाने से क्या बुझे
दिल तेरे बस में है ना मेरे इख़्तियार में

है टूटे दिल में तेरी मुहब्बत, तेरा ख़याल
कुछ रंग है बहार के उजड़ी बहार में

आँसू नहीं हैं आँख में लेकिन तेरे बग़ैर
तूफ़ान छुपे हुए हैं दिल-ए-बेक़रार में

-पयाम सईदी

Jagjit Singh Ghazal – हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं
ज़िंदा तो है जीने की अदा भूल गए हैं

ख़ुशबू जो लुटाती है मसलते हैं उसी को
एहसान का बदला यही मिलता है कली को
एहसान तो लेते है, सिला भूल गए हैं

करते है मोहब्बत का और एहसान का सौदा
मतलब के लिए करते है ईमान का सौदा
डर मौत का और ख़ौफ़-ऐ-ख़ुदा भूल गए हैं

अब मोम पिघल कर कोई पत्थर नही होता
अब कोई भी क़ुर्बान किसी पर नही होता
यूँ भटकते है मंज़िल का पता भूल गए हैं

-पयाम सईदी

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