4 Lines Shayari – अहसासों के काग़ज पर

अहसासों के काग़ज पर,
ख़ुद को लिखता रहता हूँ…

बुरे वक़्त का लम्हा हूँ,
अंधा, गूंगा, बहरा हूँ…

गिरने को हूँ यूँ समझो,
एक पुराना कमरा हूँ…

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