DilSeDilKiTalk

Baatein Dil Ki Always Rock

Category: Daagh Dehlvi Ghazal Lyrics

Daagh Dehlvi Ghazal – Kaabe Ki Hai Hawas Kabhi Kue-Butan Ki Hai

काबे की है हवस कभी कूए-बुताँ की है
मुझको ख़बर नहीं मेरी मिटटी कहाँ की है

कुछ ताज़गी हो लज़्ज़ते-आज़ार के लिए
हर दम मुझे तलाश नये आसमां की है

हसरत बरस रही है यूँ मेरे मज़ार से
कहते हैं सब ये क़ब्र किसी नौजवाँ की है

क़ासिद की गुफ्तुगू से तसल्ली हो किस तरह
छुपती नहीं वो बात, जो तेरी ज़बां की है

सुनकर मेरा फ़सानए-ग़म उसने ये कहा
हो जाए झूठ सच, यही खूबी ज़बां की है

क्योंकर न आए खुल्द से आदम ज़मीन पर
मौज़ूँ वहीं वो ख़ूब है जो शय जहाँ की है

उर्दू है जिसका नाम हमीं जानते हैं ‘दाग़’
हिन्दोस्ताँ में धूम हमारी ज़बां की है

Daagh Dehlvi Ghazal – Aarjoo Hai Wafa Kare Koi

आरजू है वफ़ा करे कोई
जी न चाहे तो क्या करे कोई
गर मर्ज़ हो दवा करे कोई
मरने वाले का क्या करे कोई
कोसते हैं जले हुए क्या क्या
अपने हक़ में दुआ करे कोई
उन से सब अपनी अपनी कहते हैं
मेरा मतलब अदा करे कोई
तुम सरापा हो सूरत-ए-तस्वीर
तुम से फिर बात क्या करे कोई
जिस में लाखों बरस की हूरें हों
ऐसी जन्नत को क्या करे कोई

Advertisements
loading...

Daagh Dehlvi Ghazal – Har Baar Maangti Hai Naya Chashm-A-Yaar Dil

Advertisements

हर बार मांगती है नया चश्म-ए-यार दिल
इक दिल के किस तरह से बनाऊं हज़ार दिल

पूछा जो उस ने तालिब-ए-रोज़-जज़ा है कौन
निकला मेरी ज़बान से बे-इख्तियार दिल

करते हो अहद-ए-वस्ल तो इतना रहे ख़याल
पैमान से ज्यदा है नापायदार दिल

उस ने कहा है सब्र पड़ेगा रक़ीब का
ले और बेकरार हुआ ऐ बेकरार दिल

Daagh Dehlvi Ghazal – Butane-Mahvashan Ujdi Hui Manzil Mein Rehte Hai

बुताने-महवशां उजड़ी हुई मंज़िल में रहते हैं
कि जिसकी जान जाती है उसी के दिल में रहते हैं

हज़ारों हसरतें वो हैं कि रोके से नहीं रुकतीं
बहोत अरमान ऐसे हैं कि दिल के दिल में रहते हैं

खुदा रक्खे मुहब्बत के लिए आबाद दोनों घर
मैं उनके दिल में रहता हूँ, वो मेरे दिल में रहते हैं

ज़मीं पर पाँव नखवत से नहीं रखते परी-पैकर
ये गोया इस मकाँ की दूसरी मंज़िल में रहते हैं

कोई नामो-निशाँ पूछे तो ऐ क़ासिद बता देना
तख़ल्लुस ‘दाग़’ है और आशिकों के दिल में रहते हैं.

Advertisements
loading...

Daagh Dehlvi Ghazal – Khatir Se Ya Lihaaz Se Main Maan To Gaya

Advertisements

खातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया
झूठी क़सम से आपका ईमान तो गया

दिल लेके मुफ़्त, कहते हैं कुछ काम का नहीं
उलटी शिकायतें रहीं, एहसान तो गया

अफ़्शाए-राज़े-इश्क़ में गो ज़िल्लतें हुईं
लेकिन उसे जता तो दिया, जान तो गया

देखा है बुतकदे में जो ऐ शैख़ कुछ न कुछ
ईमान की तो ये है कि ईमान तो गया

डरता हूँ देख कर दिले-बे-आरज़ू को मैं
सुनसान घर ये क्यों न हो मेहमान तो गया

गो नामाबर से खुश न हुआ पर हज़ार शुक्र
मुझको वो मेरे नाम से पहचान तो गया

होशो-हवासो-ताबो-तवाँ ‘दाग़’ जा चुके
अब हम भी जाने वाले हैं, सामन तो गया

Advertisements
loading...

Daagh Dehlvi Ghazal – Hasrate Le Gaye Is Bazm Se Chalne Wale

हसरतें ले गए इस बज़्म से चलने वाले
हाथ मलते ही उठे इत्र के मलने वाले

वो गए गोर-ए-गरीबाँ*पे तो आई ये सदा— आशिक़ की क़ब्र
थम ज़रा ओ रविश-ए-नाज़ से चलने वाले

देखिए क्या हवा लाए मेरे नामे का जवाब
पास उनके हैं बहुत ज़हर उगलने वाले

इन जफ़ाओं पे वफ़ा करिए न करिए लेकिन
दिल बदलता नहीं ओ आँख बदलने वाले

शर्म आलूदा*निगाहें तो करेंगी बिस्मिल——शर्म से भरी
अब कोई आन में ये तीर हैं चलने वाले

दिल ने हसरत से कहा तीर जो उसका निकला
देख इस तरहा निकलते हैं निकलने वाले

दिल-ए-बेताब वो आते हैं ख़बर आई है
सब्र कर सब्र ज़रा मेरे मचलने वाले

इमतेहान तेग़-ए-जफ़ा*का जो उन्हें हो मंज़ूर—–अत्याचार की
बच- चा कर अभी टल जाते हैं टलने वाले

गरमि-ए-सोहबत-ए-अग़यार*के शिकवे पे कहा—- दुश्मन के अधिक पास रहने पर
आप ऎ दाग़ हमेशा के हैं जलने वाले

Page 3 of 3123
loading...
loading...
Loading...
DilSeDilKiTalk © 2015