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Category: Munawwar Rana Ghazal Lyrics

Munawwar Rana Ghazal – Nahi Hoti Agar Barish To Patthar Ho Gaye Hote

नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो गए होते
ये सारे लहलहाते खेत बंजर हो गए होते

तेरे दामन से सारे शहर को सैलाब से रोका
नहीं तो मेरे ये आँसू समन्दर हो गए होते

तुम्हें अहले सियासत* ने कहीं का भी नहीं रक्खा
हमारे साथ रहते तो सुख़नवर* हो गए होते

अगर आदाब कर लेते तो मसनद* मिल गई होती
अगर लहजा बदल लेते गवर्नर हो गए होते

अहले सियासत = सियासत करने वाले लोग
सुख़नवर = कवि, शायर
मसनद = अमीरों के बैठने की गद्दी

Munawwar Rana Ghazal – Ek Na Ek Roz To Hona Hai Ye Jab Ho Jaye

एक न इक रोज़ तो होना है ये जब हो जाये
इश्क़ का कोई भरोसा नहीं कब हो जाये

हममें अजदाद की बू-बास नहीं है वरना
हम जहाँ सर को झुका दें वो अरब हो जाये

वो तो कहिये कि रवादारियाँ बाक़ी हैं अभी
वरना जो कु नहीं होता है वो सब हो जाये

ईद में यूँ तो कई रोज़ हैं बाक़ी लेकिन
तुम अगर छत पे चले जाओ ग़ज़ब हो जाये

सारे बीमार चले जाते हैं तेरी जानिब
रफ़्ता रफ़्ता तेरा घर भी न मतब हो जाये

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