Category: Khwab Shayari

Khwab Shayari – बिछङकर फिर मिलेगें यकिन कितना था

बिछङकर फिर मिलेगें यकिन कितना था !!!!
मेरा ख्वाब ही सही मगर हसिन कितना था !!!!


Khwab Shayari – सुबह टुकड़े मिले थे कुछ तकिये के नीचे


सुबह टुकड़े मिले थे कुछ तकिये के नीचे…..
ख्वाब थे जो रात को टूटे थे…..

Khwab Shayari – तू हकीकत-ए-इश्क है या कोई फरेब

तू हकीकत-ए-इश्क है या कोई फरेब..
ज़िन्दगी में आती नहीं, ख़्वाबों से जाती नहीं…!!


Khwab Shayari – फिर नींद से जाग कर आस-पास ढ़ूढ़ता हूँ तुम्हें


फिर नींद से जाग कर आस-पास ढ़ूढ़ता हूँ तुम्हें,
क्यूँ ख्वाब मे इतने पास आ जाती हो तुम….?