DilSeDilKiTalk

Baatein Dil Ki Always Rock

Daagh Dehlvi Ghazal – Butane-Mahvashan Ujdi Hui Manzil Mein Rehte Hai

बुताने-महवशां उजड़ी हुई मंज़िल में रहते हैं
कि जिसकी जान जाती है उसी के दिल में रहते हैं

हज़ारों हसरतें वो हैं कि रोके से नहीं रुकतीं
बहोत अरमान ऐसे हैं कि दिल के दिल में रहते हैं

खुदा रक्खे मुहब्बत के लिए आबाद दोनों घर
मैं उनके दिल में रहता हूँ, वो मेरे दिल में रहते हैं

ज़मीं पर पाँव नखवत से नहीं रखते परी-पैकर
ये गोया इस मकाँ की दूसरी मंज़िल में रहते हैं

कोई नामो-निशाँ पूछे तो ऐ क़ासिद बता देना
तख़ल्लुस ‘दाग़’ है और आशिकों के दिल में रहते हैं.

Advertisements
loading...

Similar Shayari…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
Loading...
DilSeDilKiTalk © 2015