Hindi Shayari – मेरी नासमझी की भी

मेरी नासमझी की भी हद ना पूछिए दोस्तों,

उन्हें खोकर हम फिर उन जैसा ही ढूढ रहे हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *