DilSeDilKiTalk

Baatein Dil Ki Always Rock

Munawwar Rana Ghazal – Betiya Dhaan Ke Paudho Ki Tarah Hoti Hai

घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं

उड़के एक रोज़ बड़ी दूर चली जाती हैं
घर की शाख़ों पे ये चिड़ियों की तरह होती हैं

सहमी-सहमी हुई रहती हैं मकाने दिल में
आरज़ूएँ भी ग़रीबों की तरह होती हैं

टूटकर ये भी बिखर जाती हैं एक लम्हे में
कुछ उम्मीदें भी घरौंदों की तरह होती हैं

आपको देखकर जिस वक़्त पलटती है नज़र
मेरी आँखें , मेरी आँखों की तरह होती हैं

बाप का रुत्बा भी कुछ कम नहीं होता लेकिन
जितनी माँएँ हैं फ़रिश्तों की तरह होती हैं



Loading...

loading...

1 Comment

Add a Comment
  1. Aaj ke yug ke youth ko ek amar raah dikhane ke liye aapko bahut bahut shukriya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
loading...
loading...
DilSeDilKiTalk © 2015