Munawwar Rana Ghazal – Jab Saafgoi Ko Fashion Bana Liya Maine

जब साफगोई को फैशन बना लिया मैंने
हर एक शख्स को दुशमन बना लिया मैंने

हुई न पूरी जरूरत जब चार पैसों की
तो अपनी जेब को दामन बना लिया मैंने

शबे-फिराक* शबे-वसल* में हुई तब्दील
खयाले-यार को दुल्हन बना लिया मैंने

चमन में जब ना इज़ाज़त मिली रिहाइश की
तो बिज़लीयों में नशेमन बना लिया मैंने

* शबे-फिराक – विरह की रात
* शबे-वसल – मिलन की रात
* नशेमन – घोंसला

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