Munawwar Rana Ghazal – Kisi Ke Jakhm Par Chahat Se Patti Kaun Bandhega

किसी के ज़ख्म पर चाहत से पट्टी कौन बान्धेगा
अग़र बहने नही होगी तो राखी कौन बान्धेगा

जहा लडकी कि इज्ज़त लुटना एक खेल बन जाए
वहा पर ऐ कबुतर तेरे चिट्ठी कौन बान्धेगा

ये बाजारे सियासत है यहाँ खुद्दारिया कैसी
सभी के हाथ मे कांसा* है मुट्ठी कोन बान्धेगा

तुम्हारी महफ़िलो मे हम बडे बुढे जरूरी है
अग़र हम हि नही होंगे तो पगडी कौन बान्धेगा

मुकद्दर देखीए वो बाँझ भी है और बुढी भी
हमेशा सोचती रहती है गठरी कौन बांधेगा

* कांसा – भिक्षा पात्र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *