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Kareeb Shayari In Hindi – आँखों से दूर दिल के

आँखों से दूर दिल के करीब था,
मैं उस का वो मेरा नसीब था;

न कभी मिला न जुदा हुआ,
रिश्ता हम दोनों का कितना अजीब था।

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Udasi Shayari In Hindi – कैसे दूर करूँ ये उदासी

कैसे दूर करूँ ये उदासी
बता दे कोई….!
लगा के सीने से रूला
दे कोई….!!

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Heart Touching Sad Ghazal Shayari In Hindi – Toot Jaye Na Bharam Hont Hilaun Kaise

टूट जाये न भरम होंठ हिलाऊँ कैसे..
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..

खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है ..
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..

तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाले..
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..

फूल होता तो तेरे दर पे सजा रहता..
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..

तू रुलाता है तो रुला मुझे जी भर के..
तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे..

Best Ever Hindi Shayari On Life – क्या खुब लिखा है किसी ने

क्या खुब लिखा है किसी ने …

“बक्श देता है ‘खुदा’ उनको, … !
जिनकी ‘किस्मत’ ख़राब होती है … !!

वो हरगिज नहीं ‘बक्शे’ जाते है, … !
जिनकी ‘नियत’ खराब होती है… !!”

न मेरा ‘एक’ होगा, न तेरा ‘लाख’ होगा, … !
न ‘तारिफ’ तेरी होगी, न ‘मजाक’ मेरा होगा … !!

गुरुर न कर “शाह-ए-शरीर” का, … !
मेरा भी ‘खाक’ होगा, तेरा भी ‘खाक’ होगा … !!

जिन्दगी भर ‘ब्रांडेड-ब्रांडेड’ करने
वालों … !
याद रखना ‘कफ़न’ का कोई ब्रांड नहीं होता … !!

कोई रो कर ‘दिल बहलाता’ है … !
और कोई हँस कर ‘दर्द’ छुपाता है … !!

क्या करामात है ‘कुदरत’ की, … !
‘ज़िंदा इंसान’ पानी में डूब जाता है और ‘मुर्दा’ तैर के
दिखाता है … !!

‘मौत’ को देखा तो नहीं, पर शायद ‘वो’ बहुत
“खूबसूरत” होगी, … !
“कम्बख़त” जो भी ‘उस’ से मिलता है,
“जीना छोड़ देता है” … !!

‘ग़ज़ब’ की ‘एकता’ देखी “लोगों की ज़माने
में” … !
‘ज़िन्दों’ को “गिराने में” और ‘मुर्दों’ को “उठाने
में” … !!

‘ज़िन्दगी’ में ना ज़ाने कौनसी बात “आख़री”
होगी, … !
ना ज़ाने कौनसी रात “आख़री” होगी ।

मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरे से ना जाने कौनसी “मुलाक़ात” “आख़री होगी” …

Romantic Love Shayari Ghazal In Hindi – Tumhare Naam Apni Zindgaani

तुम्हारे नाम अपनी जिंदगानी इस तरह कर लें,
तेरी बाहों में शब गुजरे, पनाहों में सुबह कर लें.

नहीं बंधना हमें रस्मों-रिवाजों में, समाजों में,
खुले आकाश के पंछी बसेरा हर जगह कर लें.

इरादा, हौसला, ताक़त, मोहब्बत सब तुम्ही से है,
तू गर इक बार आ जाये तो दुनिया को फ़तेह कर लें.

दरो-दीवार पर फैली उदासी को मिटा दें हम,
हर इक शै में तबस्सुम हो, चलो ऐसी वजह कर लें.

अदावत तो है अपनी नफरतों के रहनुमाओं से,
जो दिल में दे जगह उससे भला न क्यूँ सुलह कर लें?

ख़ुदा की कद्र करता है मगर काफिर भी है “परिमल”,
कभी आओ जो महफ़िल में, इबादत पर जिरह कर लें.

– समीर परिमल

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