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Baatein Dil Ki Always Rock

Qateel Shifai Ghazal – Yun Chup Rehna Thik Nahi Koi Mithi Baat Karo

यूँ चुप रहना ठीक नहीं कोई मीठी बात करो
मोर चकोर पपीहा कोयल सब को मात करो

सावन तो मन बगिया से बिन बरसे बीत गया
रस में डूबे नगमे की अब तुम बरसात करो

हिज्र की एक लम्बी मंजिल को जानेवाला हूँ
अपनी यादों के कुछ साये मेरे साथ करो

मैं किरनों की कलियाँ चुनकर सेज बना लूँगा
तुम मुखड़े का चाँद जलाओ रौशन रात करो

प्यार बुरी शय नहीं है लेकिन फिर भी यार “क़तील”
गली-गली तकसीम* न तुम अपने जज़्बात करो

* तकसीम – बाँटना

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