Sahir Ludhianvi Ghazal – Lab Pe Pabandi Nahi Ehsas Pe Pehra To Hai

लब पे पाबन्दी नहीं एहसास पे पहरा तो है
फिर भी अहल-ए-दिल को अहवाल-ए-बशर कहना तो है

अपनी ग़ैरत बेच डालें अपना मसलक़ छोड़ दें
रहनुमाओ में भी कुछ लोगों को ये मन्शा तो है

है जिन्हें सब से ज्यादा दावा-ए-हुब्ब-ए-वतन
आज उन की वजह से हुब्ब-ए-वतन रुस्वा तो है

बुझ रहे हैं एक एक कर के अक़ीदों के दिये
इस अन्धेरे का भी लेकिन सामना करना तो है

झूठ क्यूं बोलें फ़रोग़-ए-मस्लहत के नाम पर
जि़न्दगी प्यारी सही लेकिन हमें मरना तो है

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