Waseem Barelvi Ghazal – Kuch Is Tarah Veh Meri Zindagi Mein Aaya Tha

कुछ इस तरह वह मेरी जिंदगी में आया था
कि मेरा होते हुए भी, बस एक साया था

हवा में उडने की धुन ने यह दिन दिखाया था
उडान मेरी थी, लेकिन सफर पराया था

यह कौन राह दिखाकर चला गया मुझको
मैं जिंदगी में भला किस के काम आया था

मैं अपने वायदे पे कायम न रह सका वरना
वह थोडी दूर ही जाकर तो लौट आया था

न अब वह घर है , न उस के लोग याद “वसीम”
न जाने उसने कहाँ से मुझे चुराया था

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