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Waseem Barelvi Ghazal – Raat Ke Tukdo Pe Palna Chhod De

रात के टुकड़ों पे पलना छोड़ दे
शमा से कहना के जलना छोड़ दे

मुश्किलें तो हर सफ़र का हुस्न हैं
कैसे कोई राह चलना छोड़ दे

तुझसे उम्मीदे- वफ़ा बेकार है
कैसे इक मौसम बदलना छोड़ दे

मैं तो ये हिम्मत दिखा पाया नहीं
तू ही मेरे साथ चलना छोड़ दे

कुछ तो कर आदाबे-महफ़िल का लिहाज़
यार ! ये पहलू बदलना छोड़ दे

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