Yaad Shayari – तुम्हारी याद जैसे किसी ग़रीब की गरीबी

तुम्हारी याद जैसे किसी ग़रीब की गरीबी,,
कमबख्त बढ़ती ही चली जा रही है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *