Jagjit Singh Ghazal – तेरा चेहरा है आईने जैसा


तेरा चेहरा है आईने जैसा
क्यों न देखूँ है देखने जैसा

तुम कहो तो मैं पूछ लूँ तुमसे
है सवाल एक पूछने जैसा

दोस्त मिल जाएँगे कई लेकिन
न मिलेगा कोई मेरे जैसा

तुम अचानक मिले थे जब पहले
पल नही है वो भूलने जैसा

-पयाम सईदी

One comment

Leave a Reply