Majrooh Sultanpuri Ghazal – Takdir Ka Shikwa Bemani Jeena Hi Tujhe Manjoor Nahi


तक़दीर का शिकवा बेमानी, जीना ही तुझे मन्ज़ूर नहीं
आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो कोई मजबूर नहीं

ये महनफ़िले-अहले-दिल है यहाँ हम सब मैकश हम सब साक़ी
तफ़रीक़ करें इन्सानों में इस बज़्म का ये दस्तूर नहीं

जन्नत-ब-निगह, तसनीम-ब-लब, अन्दाज़ उसके ऐ शैख़ न पूछ
मैं जिससे मोहब्बत करता हूँ, इन्सान है ख़याली हूर नहीं

वो कौन सी सुबहें हैं जिनमें बेदार नहीं अफ़सू तेरा
वो कौन सी काली रातें हैं जो मेरे नशे में चूर नहीं

सुनते हैं कि काँटे से गुल तक हैं राह में लाखों वीराने
कहता है मगर ये अ़ज़्मे-जुनू सहरा से ग़ुलिस्ताँ दूर नहीं

‘मजरूह’ उठी है मौजे-सबा आसार लिए तूफ़ानों के
हर क़तरा-ए-शबनम बन जाए इक जू-ए-रवां कुछ दूर नहीं

Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Hum Hai Rahi Pyar Ke Humse Kuchh Na Boliye

हम हैं राही प्यार के, हमसे कुछ ना बोलिए
जो भी प्यार से मिला, हम उसी के हो लिए

दर्द भी हमें कुबूल, चैन भी हमें कुबूल
हमने हर तरह के फूल, हार में पिरो लिए
जो भी प्यार…

धूप थी नसीब में, तो धूप लिया है दम
चाँदनी मिली तो हम, चाँदनी में सो लिए
जो भी प्यार…

दिल पे आसरा लिए, हम तो बस यूँ ही जिये
इक कदम पे हँसस लिए, इक कदम पे रो लिए
जो भी प्यार…

राह में पड़े हैं हम, कब से आप की क़सम
देखिये तो कम से कम, बोलिए न बोलिए
जो भी प्यार…

Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Sathi Na Koi Manzil Diya Hai Na Koi Mehfil

साथी न कोई मंज़िल
दिया है न कोई महफ़िल
चला मुझे लेके ऐ दिल
अकेला कहाँ

हमदम कोई मिले कहीं
ऐसे नसीब ही नहीं
बेदर्द है ज़मीं, दूर आसमाँ
साथी न कोई मंजिल…

गलियां हैं अपने देस की
फिर भी हैं जैसे अजनबी
किसको कहे कोई, अपना यहाँ
साथी न कोई मंजिल…

पत्थर के आशना मिले
पत्थर के देवता मिले
शीशे का दिल लिये, जाऊँ कहाँ
साथी न कोई मंजिल…


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Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Hamare Baad Ab Mehfil Mein Afsane Bayan Honge

हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़साने बयां होंगे…
बहारें हमको ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंगे

इसी अंदाज़ से झूमेगा मौसम, गाएगी दुनिया
मोहब्बत फ़िर हसीं होगी, नज़ारे फ़िर जवाँ होंगे

न तुम होगे न हम होंगे, न दिल होगा मगर फ़िर भी
हज़ारों मंजिलें होंगी हज़ारों कारवां होंगे

Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Mera To Jo Bhi Kadam Hai Vo Teri Rah Mein Hai


मेरा तो जो भी कदम है, वो तेरी राह में हैं
के तू कहीं भी रहे तू मेरी निगाह में हैं

खरा हैं दर्द का रिश्ता तो फिर जुदाई क्या
जुदा तो होते हैं वो, खोट जिनकी चाह में हैं

छूपा हुआ सा मुझ हीं में, है तू कहीं ऐ दोस्त
मेरी हँसी में नहीं है, तो मेरी आह में हैं

Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Rehte The Kabhi Jinke Dil Mein

रहते थे कभी जिनके दिल में
हम जान से भी प्यारों की तरह
बैठे हैं उन्ही के कूचे में
हम आज गुनहगारों की तरह

दावा था जिन्हें हमदर्दी का
खुद आके न पूछा हाल कभी
महफ़िल में बुलाया है हम पे
हँसने को सितमगारों की तरह
रहते थे…

बरसों से सुलगते तन मन पर
अश्कों के तो छींटे दे ना सके
तपते हुए दिल के ज़ख्मों पर
बरसे भी तो अंगारों की तरह
रहते थे…

सौ रुप धरे जीने के लिये
बैठे हैं हज़ारों ज़हर पिये
ठोकर ना लगाना हम खुद हैं
गिरती हुई दीवारों की तरह
रहते थे…

Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Hai Apna Dil To Awara Na Jane Kis Pe Aayega

है अपना दिल तो आवारा, न जाने किस पे आयेगा

हसीनों ने बुलाया, गले से भी लगाया
बहुत समझाया, यही न समझा
बहुत भोला है बेचारा, न जाने किस पे आयेगा
है अपना दिल तो आवारा …

अजब है दीवाना, न घर ना ठिकाना
ज़मीं से बेगाना, फलक से जुदा
ये एक टूटा हुआ तारा, न जाने किस पे आयेगा
है अपना दिल तो आवारा …

ज़माना देखा सारा, है सब का सहारा
ये दिल ही हमारा, हुआ न किसी का
सफ़र में है ये बंजारा, न जाने किस पे आयेगा
है अपना दिल तो आवारा …

हुआ जो कभी राज़ी, तो मिला नहीं काज़ी
जहाँ पे लगी बाज़ी, वहीं पे हारा
ज़माने भर का नाकारा, न जाने किस पे आयेगा
है अपना दिल तो आवारा …

है अपना दिल तो आवारा
न जाने किस पे आएगा …

(रुकेगा न रुका है न जाने धुन ही क्या है
कभी ये रस्ता है कभी वो रस्ता) – २
फिरे है दर बदर मारा
न जाने किस पे आएगा …

(किसीसे ये मिला था बताए कोई क्या था
बेदारी का समा था के था वो सपना) – २
ख़ुद अपने दर्द से हारा
न जाने किस पे आएगा …

Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Diwana Aadmi Ko Banati Hai Rotiyan

दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियाँ -२
खुद नाचती हैं सबको नचाती हैं रोटियाँ -२
दीवाना आदमी को …

बूढ़ा चलाए ठेले को फाकों से झूल के -२
बच्चा उठाए बोझ खिलौनों को भूल के -२
( देखा न जाए जो ) -२ सो दिखाती हैं रोटियाँ -२
दीवाना आदमी को …

बैठी है जो चेहरे पे मल के जिगर का ख़ूँ
दुनिया बुरा कहे इन्हें पर मैं तो ये कहूँ -२
कोठे पे बैठ ओ कोठे पे बैठ आँख लड़ाती हैं रोटियाँ -२
दीवाना आदमी को …

कहता था इक फ़क़ीर कि रखना ज़रा नज़र
रोटी को आदमी ही नहीं खाते बेख़बर -२
( अक्सर तो आदमी को ) -२ खाती हैं रोटियाँ -२
दीवाना आदमी को …

तुझको पते की बात बताऊँ मैं जान-ए-मन
क्यूँ चाँद पर पहुँचने की इन्सां को है लगन -२
( इन्सां को चाँद में ) -२ नज़र आती हैं रोटियाँ -२
दीवाना आदमी को …


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Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Ishq Walon Se Na Puchhon Ki

इश्क़ वालों से न पूंछो कि
उनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है
जुदा हो हमसफ़र जिसका, वो उसको याद करता है
न हो जिसका कोई वो मिलने की फ़रियाद करता है

सलाम-ए-इश्क़ मेरी जाँ ज़रा क़ुबूल कर लो
तुम हमसे प्यार करने की ज़रा सी भूल कर लो
मेरा दिल बेचैन, मेरा दिल बेचैन है हमसफ़र के लिये

मैं सुनाऊँ तुम्हें बात इक रात की
चांद भी अपनी पूरी जवानी पे था
दिल में तूफ़ान था, एक अरमान था
दिल का तूफ़ान अपनी रवानी पे था
एक बादल उधर से चला झूम के
देखते देखते चांद पर छा गया
चांद भी खो गया उसके आगोश में
उफ़ ये क्या हो गया जोश ही जोश में
मेरा दिल धडका,
मेरा दिल तडपा किसीकी नज़र के लिये
सलामे-इश्क़ मेरी जां ज़रा क़ुबूल कर लो …

इसके आगे की अब दास्तां मुझसे सुन
सुनके तेरी नज़र डबडबा जाएगी
बात दिल की जो अब तक तेरे दिल में थी
मेरा दावा है होंठों पे आ जाएगी
तू मसीहा मुहब्बत के मारों का है
हम तेरा नाम सुनके चले आए हैं
अब दवा दे हमें या तू दे दे ज़हर
तेरी महफ़िल में ये दिलजले आए हैं
एक एहसान कर, एहसान कर,
इक एहसान कर अपने मेहमान पर
अपने मेहमान पर एक एहसान कर
दे दुआएं, दे दुआएं तुझे उम्र भर के लिये
सलामे-इश्क़ मेरी जां ज़रा क़ुबूल कर लो …

Majrooh Sultanpuri Filmi Songs – Ruthke Humse Kahin Jab Chale Jaoge Tum


रूठके हमसे कहीं जब चले जाओगे तुम
ये ना सोचा था कभी इतने याद आओगे तुम

मैं तो ना चला था दो कदम भी तुम बिन
फिर भी मेरा बचपन यही समझा हर दिन
(छोड़कर मुझे भला अब कहां जाओगे तुम) २
ये ना सोचा था …

बातों कभी हाथों से भी मारा है तुम्हें
सदा यही कहके ही पुकारा है तुम्हें
(क्या कर लोगे मेरा जो बिगड़ जाओगे तुम) २
ये ना सोचा था …

देखो मेरे आंसू यही करते है पुकार
हो आओ चले आओ मेरे भाई मेरे यार
(पोंछने आंसू मेरे क्या नहीं आओगे तुम) २
ये ना सोचा था …

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